Dailycurrentdose: चंद्रयान 2: लॉन्चिंग से लेकर अब तक की पूरी कहानी, जानें अब आगे क्या होगा?

Tuesday, September 10, 2019

चंद्रयान 2: लॉन्चिंग से लेकर अब तक की पूरी कहानी, जानें अब आगे क्या होगा?


चंद्रयान 2: लॉन्चिंग से लेकर अब तक की पूरी कहानी, जानें अब आगे क्या होगा?

चंद्रयान 2: लॉन्चिंग से लेकर अब तक की पूरी कहानी, जानें अब आगे क्या होगा?


चन्द्रयान-2 (Chandrayaan-2) मिशन 22 जुलाई 2019 को आंध्र प्रदेश के श्रीहरीकोटा में सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से लॉन्च किया गया था. चंद्रयान-2 अब चांद के दक्षिणी ध्रुव तक पहुंचने के लिए 48 दिन की यात्रा शुरू हो गई थी. भारत इससे पहले चंद्रयान-2 की लॉन्चिंग 15 जुलाई को करने वाला था, लेकिन क्रॉयोजेनिक इंजन में लीकेज के कारण रोक दिया गया था.
चन्द्रयान-2 मिशन का मुख्य उद्देश्य चांद की सतह का नक्शा तैयार करना, खनिजों की मौजूदगी का पता लगाना, चंद्रमा के बाहरी वातावरण को स्कैन करना और किसी न किसी रूप में पानी की उपस्थिति का पता लगाना था. चंद्रयान 1 की खोजों को आगे बढ़ाने के लिए चंद्रयान-2 को भेजा गया था.

🌕22 जुलाई से लेकर 13 अगस्त 2019 तक
चंद्रयान-2 अंतरिक्ष यान 22 जुलाई 2019 से लेकर 13 अगस्त 2019 तक पृथ्वी के चारों तरफ चक्कर लगाया. अर्थात 23 दिन तक चंद्रयान-2 पृथ्वी की अलग-अलग कक्षाओं में परिक्रमा करता रहा.

🌕13 अगस्त से 19 अगस्त 2019 तक
चंद्रयान-2 इसके बाद 13 अगस्त से 19 अगस्त 2019 तक चांद की तरफ जाने वाली लंबी कक्षा में यात्रा किया. चंद्रयान-2 को 14 अगस्त 2019 को लूनर ट्रांसफर ट्रेजेक्टरी पर भेजा गया था.

🌕20 अगस्त 2019 को चंद्रयान-2
इसरो ने 20 अगस्त 2019 को चंद्रयान-2 को चांद की पहली कक्षा में सफलतापूर्वक दाखिल करा दिया था. इसके साथ ही इसरो के नाम एक और बड़ी उपलब्धि हासिल हो गई थी.

🌕21 अगस्त से 01 सितंबर
21 अगस्त से 01 सितंबर तक चंद्रयान-2 चंद्रमा की चार और कक्षाओं को पार किया था. अर्थात 28 अगस्त से 30 अगस्त तथा फिर 1 सितंबर को चंद्रयान-2 चौथी कक्षा को पार किया. उस समय चांद से उसकी दूरी 18 हजार किलोमीटर से घटकर मात्र 100 किलोमीटर हो गई थी.

🌕02 सितंबर
02 सितंबर 2019 को चंद्रयान-2 मिशन लैंडर ऑर्बिटर से अलग हो गया था. विक्रम लैंडर अपने अंदर मौजूद प्रज्ञान रोवर को लेकर चांद की ओर बढ़ना शुरू किया था.

🌕03 सितंबर
इसरो के वैज्ञानिकों द्वारा 03 सितंबर 2019 को विक्रम लैंडर की पूरी तरह से जांच किया गया. इसरो के वैज्ञानिकों ने इसके लिए 3 सेकंड के लिए उसका इंजन ऑन किये थे तथा उसकी कक्षा में मामूली बदलाव किये.

🌕04 सितंबर
इसरो वैज्ञानिक विक्रम लैंडर को 04 सितंबर को चांद के सबसे नजदीकी कक्षा में पहुंचाया था. इस कक्षा की एपोजी (चांद से कम दूरी) 35 किमी और पेरीजी (चांद से ज्यादा दूरी) 97 किमी थी.

🌕07 सितंबर
चंद्रयान-2 के अंतिम चरण में भारत के मून लैंडर विक्रम से उस समय संपर्क टूट गया था जब वह चंद्रमा की सतह की ओर बढ़ रहा था. इसरो के अनुसार, रात 1:37 बजे लैंडर की चांद पर ‘सॉफ्ट लैंडिंग’ की प्रक्रिया शुरू हो गई थी. लेकिन लगभग 2.1 किमी ऊपर संपर्क टूट गया था. इसरो के अध्यक्ष के. सिवन ने कहा की डेटा की समीक्षा की जा रही है.

🌕अब आगे क्या होगा:

02 सितंबर 2019 को ‘विक्रम’ लैंडर को ऑर्बिटर से सफलतापूर्वक अलग कर दिया गया था. वह अभी भी चंद्रमा की सतह से 119 किमी से 127 किमी की ऊंचाई पर घूम रहा है. 2,379 किलो वजनी ऑर्बिटर के साथ 8 पेलोड भी हैं और यह एक साल तक काम करेगा. अर्थात लैंडर तथा रोवर की स्थिति पता नहीं चलने पर भी मिशन जारी रहेगा. वहां की महत्वपूर्ण जानकारी इसरो को भेजेगा. ऐसे में अब चांद के अगले अभियानों के लिए ऑर्बिटर से मिलने वाली जानकारी महत्वपूर्ण हो सकती हैं.

🌕इजरायल के यान के साथ भी ऐसी ही दिक्कत आई थी
इजराइल की निजी कंपनी स्पेसएल ने अप्रैल 2019 में अपना मून मिशन भेजा था. लेकिन इजराइल का यान बेरेशीट चंद्रमा की सतह पर उतरने के दौरान क्रैश हो गया था. इस यान के इंजन में कुछ तकनीकी दिक्कत आने के बाद उसका ब्रेकिंग सिस्टम फेल हो गया था. वे चंद्रमा की सतह से लगभग 10 किलोमीटर दूर था. तभी उसी समय पृथ्वी से उसका संपर्क टूट गया और रोवर चंद्रमा की सतह पर दुर्घटनाग्रस्त हो गया था.

🌕पहली बार दक्षिणी ध्रुव पर उतरने की कोशिश
इसरो के वैज्ञानिकों ने पहले ही बताया था कि लैंडिंग के आखिरी पंद्रह मिनट सबसे जटिल होंगे. बहुत तेज गति से चल रहे ‘विक्रम’ को चांद की सतह तक सफलतापूर्वक उतारना बहुत बड़ी चुनौती थी. ‘विक्रम’ ने अंतिम समय में अपनी दिशा बदल दी, जिसके बाद उससे संपर्क टूट गया. आपको बता दे कि दक्षिणी ध्रुव पर आज तक कोई भी देश लैंड नहीं कर सका है.
चंद्रयान 2: लॉन्चिंग से लेकर अब तक की पूरी कहानी, जानें अब आगे क्या होगा?

🌕प्रधानमंत्री मोदी ने कहा की जीवन में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं
इसरो के वैज्ञानिकों ने लगभग 2:07 बजे बताया कि संपर्क बहाल करने की कोशिश की जा रही है. हालांकि, इसरो प्रमुख के सिवन ने 2.18 बजे बताया की ‘विक्रम’ से संपर्क टूट गया है. हम आंकड़ों का विश्लेषण कर रहे हैं. वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने के. सिवन और उनकी टीम का हौसला बढ़ाते हुए कहा की जीवन में उतार-चढ़ाव आते रहते है

🌕जीएसएलवी एमके-3 का इस्तेमाल
इस मिशन हेतु भारत के सबसे शक्तिशाली 640 टन के रॉकेट जीएसएलवी एमके-3 का इस्तेमाल किया गया था. यह 3890 किलो के चंद्रयान-2 को लेकर गया था.

🛰चंद्रयान-1 साल 2008 में लॉन्च हुआ
भारत ने इससे पहले चंद्रयान-1 वर्ष 2008 में लॉन्च किया था. यह भी मिशन चाँद पर पानी की तलाश में निकला था. भारत ने वर्ष 1960 के दशक में अंतरिक्ष कार्यक्रम शुरू किया था. चंद्रयान 1 की खोजों को आगे बढ़ाने हेतु चंद्रयान-2 को भेजा गया है.

🛰चंद्रयान-2 क्या है?

चंद्रयान-2 एक अंतरिक्ष यान है. इसके तीन सबसे अहम हिस्से लैंडर, ऑर्बिटर और रोवर हैं. चंद्रयान-2 दस साल के भीतर भारत का चंद्रमा पर भेजा जाने वाला दूसरा अभियान है. चंद्रयान-2 का वजन 3,877 किलोग्राम है. इसरो ने पहले सफल चंद्रमा मिशन - चंद्रयान-1 का प्रक्षेपण किया था जिसने चंद्रमा के 3,400 चक्कर लगाए थे. चंद्रयान-1 (29 अगस्त 2009 तक) 312 दिनों तक काम करता रहा था. यह चंद्रयान-1 मिशन से करीब तीन गुना ज्यादा है.
ऑर्बिटरः चंद्रयान-2 का ऑर्बिटर चांद से 100 किमी ऊपर स्थापित किया गया. ऑर्बिटर' में आठ पेलोड, तीन लैंडर और दो रोवर है. यह चक्कर लगाते हुए लैंडर और रोवर से प्राप्त जानकारी को इसरो सेंटर पर भेजेगा.

लैंडर (विक्रम): लैंडर विक्रम में 4 पेलोड हैं. यह लैंडर 15 दिनों तक वैज्ञानिक प्रयोग में रहेगा. इसरो के स्पेस एप्लीकेशन सेंटर, अहमदाबाद ने इसकी सबसे शुरुआत की डिजाइन बनाया था. इसे बाद में बेंगलुरु के यूआरएससी ने विकसित किया था. लैंडर का नाम इसरो के संस्थापक और भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के जनक विक्रम साराभाई के नाम पर रखा गया है.

चंद्रयान 2: लॉन्चिंग से लेकर अब तक की पूरी कहानी, जानें अब आगे क्या होगा?

रोवर (प्रज्ञान): यह एक रोबोट है. इसका वजन 27 किलोग्राम है. इस रोबोट पर ही पूरे मिशन की जिम्मदारी है. इसमें दो पेलोड हैं. चांद की सतह पर यह करीब 400 मीटर की दूरी तय करेगा. यह इस दौरान विभिन्न वैज्ञानिक प्रयोग करेगा.


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