Dailycurrentdose: September 2019

Friday, September 13, 2019

Most important questions related to chandrayan2 in Hindi for exam


चन्द्रयान 2 से सम्बंधित महत्त्वपूर्ण 40 प्रश्न एक जगह


 प्रश्न1 : चंद्रयान मिशन 2 को कब लांच किया गया?
 उत्तर-  22 जुलाई 2019

 प्रश्न2 :Chandrayaan-2 अभियान को भारत के किस शक्तिशाली रॉकेट से लांच किया गया?
 उत्तर –GSLV  मार्क 3

 प्रश्न3 :भारत की कौन सी संस्था  ने चंद्रयान मिशन 2 को लॉन्च किया?
 उत्तर-  ISRO (भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन)

प्रश्न4   :चंद्रयान-2   को किस अंतरिक्ष केंद्र से लांच किया गया?
 उत्तर-  सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र

 प्रश्न5 : चंद्रयान मिशन 2 को लॉन्च करने में कितना खर्च आया?
 उत्तर- 960  करोड़ रुपए

 प्रश्न6: ISRO (भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन) का मुख्यालय कहां पर स्थित है?
 उत्तर-  बेंगलुरु

 प्रश्न7  : चंद्रयान-2  को कहां पर उतरना है?
 उत्तर-  चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर

  प्रश्न8 : चंद्रयान-2 अभियान को कहां से लांच किया गया?
 उत्तर-  श्रीहरिकोटा

 प्रश्न9 :सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र कहां पर स्थित है?
 उत्तर- Andhra Pradesh

 प्रश्न10 :भारत का अंतरिक्ष मंत्रालय किसके पास है?
 उत्तर-  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

 प्रश्न11  चंद्रयान मिशन 2 के प्रोजेक्ट डायरेक्टर कौन है?
 उत्तर-  एम वनीता और रितु करीधल

 प्रश्न12  वर्तमान में ISRO (भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन)  के अध्यक्ष कौन है?
 उत्तर- के सिवन (2019)

 प्रश्न13 चंद्रयान-2 को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर पहुंचने में कितने दिन का समय  लगेगा?
 उत्तर- 53 से 54  दिन

 प्रश्न14 चंद्रयान-2  अभियान भारत का चंद्रमा के लिए कौन सा मिशन होगा?
 उत्तर-  दूसरा

 प्रश्न15  चंद्रयान मिशन1  कब लांच किया गया था?
 उत्तर-  22 अक्टूबर 2008

 प्रश्न16 चंद्रयान-2 को कहां से लांच किया गया था?
 उत्तर-  सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र ( श्रीहरिकोटा)

 प्रश्न17 चंद्रयान मिशन 1  को लांच करने में कितना खर्चा आया था?
 उत्तर- 380  करोड़ रुपए

 प्रश्न18  चंद्रयान मिशन 1 के समय इसरो के अध्यक्ष कौन थे?
 उत्तर-  जी माधवन नायर

 प्रश्न19  चंद्रयान-2  को किस रॉकेट के जरिए लॉन्च किया गया था?
 उत्तर- PSLV-C11

  प्रश्न20  चंद्रयान-2 चंद्रमा पर कब पहुंचा था?
 उत्तर-  22 अक्टूबर 2008 को

   
  प्रश्न21  चंद्रयान-2 की सफल सेंडिंग के साथ भारत चंद्रमा की सत्ता है पर पहुंचने वाला दुनिया का कौन सा देश बन जाएगा?
 उत्तर-  चौथा

प्रश्न22  चंद्रयान 2 के तीन मत्वपूर्ण हिस्से कौन से हैं?
 उत्तर-  ऑर्बिटर, लैंडिंग  एवं रोवर

 प्रश्न23  चंद्रयान मिशन 2 लैनडर का क्या नाम रखा गया है?
उत्तर-  विक्रम

 प्रश्न24  चंद्रयान-2 का हिस्सा ऑर्बिटल क्या कार्य करेगा?
 उत्तर-  चंद्रमा के चारों ओर चक्कर लगाएगा

 प्रश्25 चंद्रयान-2 का हिस्सा  लैनडर क्या कार्य करेगा?
 उत्तर-  चंद्रमा की सतह पर उतरेगा

 प्रश्न26  चंद्रयान-2 का हिस्सा रोवर क्या कार्य करेगा?
 उत्तर-  चंद्रमा की सतह पर उतरेगा और चलेगा

 प्रश्न27  किस देश का चंद्रयान मिशन बेरेशीट असफल हो गया था?
 उत्तर-  इजराइल

प्रश्न28 चंद्रयान मिशन बेरेशीट को कब लॉन्च किया गया था?
 उत्तर-  22 फरवरी को

 प्रश्न29  पृथ्वी और चंद्रमा के बीच की दूरी कितनी है?
 उत्तर- 384400 km

प्रश्न30  चंद्रमा से परावर्तित रोशनी पृथ्वी तक कितने समय में पहुंचती हैं?
 उत्तर- 1.30  सेकंड

 प्रश्न31  चंद्रमा का गुरुत्वाकर्षण पृथ्वी की अपेक्षा कितना है?
 उत्तर- 1\6

प्रश्न32  पृथ्वी की सतह से चांद का कितने प्रतिशत भाग दिखाई देता है?
 उत्तर-  59%

 प्रश्न33  चंद्रमा का व्यास कितना होता है?
 उत्तर- 3478 किमी

 प्रश्न34 चंद्रमा के वर्णन की विद्या को क्या कहा जाता है?
 उत्तर- सेलेनोलॉजी (Selenology)

 प्रश्न35  चांद पर कदम रखने वाला प्रथम इंसान नील आर्मस्ट्रांग किस अंतरिक्ष यान से चंद्रमा पर उतरे थे?
 उत्तर-  अपोलो11

 प्रश्न36 नील आर्मस्ट्रांग ने चांद पर कदम कब रखा था?
 उत्तर-   20 जुलाई 1969

 प्रश्न37  किसे जीवाश्म ग्रह के नाम से  भी जाना जाता है?
उत्तर-  चंद्रमा

 प्रश्न38  चंद्रयान-2 का वजन कितना है?
 उत्तर- 3877 किलोग्राम

 प्रश्न39 चांद के दक्षिणी ध्रुव   पर उतरने वाला दुनिया का पहला देश कौन  बना है?
 उत्तर-  भारत

 प्रश्न40 आर्बिटल का क्या काम है?
 उत्तर-  मुख्य उद्देश्य पृथ्वी और लैंडर के बीच कम्युनिकेशन करना।

Tuesday, September 10, 2019

चंद्रयान 2: लॉन्चिंग से लेकर अब तक की पूरी कहानी, जानें अब आगे क्या होगा?


चंद्रयान 2: लॉन्चिंग से लेकर अब तक की पूरी कहानी, जानें अब आगे क्या होगा?

चंद्रयान 2: लॉन्चिंग से लेकर अब तक की पूरी कहानी, जानें अब आगे क्या होगा?


चन्द्रयान-2 (Chandrayaan-2) मिशन 22 जुलाई 2019 को आंध्र प्रदेश के श्रीहरीकोटा में सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से लॉन्च किया गया था. चंद्रयान-2 अब चांद के दक्षिणी ध्रुव तक पहुंचने के लिए 48 दिन की यात्रा शुरू हो गई थी. भारत इससे पहले चंद्रयान-2 की लॉन्चिंग 15 जुलाई को करने वाला था, लेकिन क्रॉयोजेनिक इंजन में लीकेज के कारण रोक दिया गया था.
चन्द्रयान-2 मिशन का मुख्य उद्देश्य चांद की सतह का नक्शा तैयार करना, खनिजों की मौजूदगी का पता लगाना, चंद्रमा के बाहरी वातावरण को स्कैन करना और किसी न किसी रूप में पानी की उपस्थिति का पता लगाना था. चंद्रयान 1 की खोजों को आगे बढ़ाने के लिए चंद्रयान-2 को भेजा गया था.

🌕22 जुलाई से लेकर 13 अगस्त 2019 तक
चंद्रयान-2 अंतरिक्ष यान 22 जुलाई 2019 से लेकर 13 अगस्त 2019 तक पृथ्वी के चारों तरफ चक्कर लगाया. अर्थात 23 दिन तक चंद्रयान-2 पृथ्वी की अलग-अलग कक्षाओं में परिक्रमा करता रहा.

🌕13 अगस्त से 19 अगस्त 2019 तक
चंद्रयान-2 इसके बाद 13 अगस्त से 19 अगस्त 2019 तक चांद की तरफ जाने वाली लंबी कक्षा में यात्रा किया. चंद्रयान-2 को 14 अगस्त 2019 को लूनर ट्रांसफर ट्रेजेक्टरी पर भेजा गया था.

🌕20 अगस्त 2019 को चंद्रयान-2
इसरो ने 20 अगस्त 2019 को चंद्रयान-2 को चांद की पहली कक्षा में सफलतापूर्वक दाखिल करा दिया था. इसके साथ ही इसरो के नाम एक और बड़ी उपलब्धि हासिल हो गई थी.

🌕21 अगस्त से 01 सितंबर
21 अगस्त से 01 सितंबर तक चंद्रयान-2 चंद्रमा की चार और कक्षाओं को पार किया था. अर्थात 28 अगस्त से 30 अगस्त तथा फिर 1 सितंबर को चंद्रयान-2 चौथी कक्षा को पार किया. उस समय चांद से उसकी दूरी 18 हजार किलोमीटर से घटकर मात्र 100 किलोमीटर हो गई थी.

🌕02 सितंबर
02 सितंबर 2019 को चंद्रयान-2 मिशन लैंडर ऑर्बिटर से अलग हो गया था. विक्रम लैंडर अपने अंदर मौजूद प्रज्ञान रोवर को लेकर चांद की ओर बढ़ना शुरू किया था.

🌕03 सितंबर
इसरो के वैज्ञानिकों द्वारा 03 सितंबर 2019 को विक्रम लैंडर की पूरी तरह से जांच किया गया. इसरो के वैज्ञानिकों ने इसके लिए 3 सेकंड के लिए उसका इंजन ऑन किये थे तथा उसकी कक्षा में मामूली बदलाव किये.

🌕04 सितंबर
इसरो वैज्ञानिक विक्रम लैंडर को 04 सितंबर को चांद के सबसे नजदीकी कक्षा में पहुंचाया था. इस कक्षा की एपोजी (चांद से कम दूरी) 35 किमी और पेरीजी (चांद से ज्यादा दूरी) 97 किमी थी.

🌕07 सितंबर
चंद्रयान-2 के अंतिम चरण में भारत के मून लैंडर विक्रम से उस समय संपर्क टूट गया था जब वह चंद्रमा की सतह की ओर बढ़ रहा था. इसरो के अनुसार, रात 1:37 बजे लैंडर की चांद पर ‘सॉफ्ट लैंडिंग’ की प्रक्रिया शुरू हो गई थी. लेकिन लगभग 2.1 किमी ऊपर संपर्क टूट गया था. इसरो के अध्यक्ष के. सिवन ने कहा की डेटा की समीक्षा की जा रही है.

🌕अब आगे क्या होगा:

02 सितंबर 2019 को ‘विक्रम’ लैंडर को ऑर्बिटर से सफलतापूर्वक अलग कर दिया गया था. वह अभी भी चंद्रमा की सतह से 119 किमी से 127 किमी की ऊंचाई पर घूम रहा है. 2,379 किलो वजनी ऑर्बिटर के साथ 8 पेलोड भी हैं और यह एक साल तक काम करेगा. अर्थात लैंडर तथा रोवर की स्थिति पता नहीं चलने पर भी मिशन जारी रहेगा. वहां की महत्वपूर्ण जानकारी इसरो को भेजेगा. ऐसे में अब चांद के अगले अभियानों के लिए ऑर्बिटर से मिलने वाली जानकारी महत्वपूर्ण हो सकती हैं.

🌕इजरायल के यान के साथ भी ऐसी ही दिक्कत आई थी
इजराइल की निजी कंपनी स्पेसएल ने अप्रैल 2019 में अपना मून मिशन भेजा था. लेकिन इजराइल का यान बेरेशीट चंद्रमा की सतह पर उतरने के दौरान क्रैश हो गया था. इस यान के इंजन में कुछ तकनीकी दिक्कत आने के बाद उसका ब्रेकिंग सिस्टम फेल हो गया था. वे चंद्रमा की सतह से लगभग 10 किलोमीटर दूर था. तभी उसी समय पृथ्वी से उसका संपर्क टूट गया और रोवर चंद्रमा की सतह पर दुर्घटनाग्रस्त हो गया था.

🌕पहली बार दक्षिणी ध्रुव पर उतरने की कोशिश
इसरो के वैज्ञानिकों ने पहले ही बताया था कि लैंडिंग के आखिरी पंद्रह मिनट सबसे जटिल होंगे. बहुत तेज गति से चल रहे ‘विक्रम’ को चांद की सतह तक सफलतापूर्वक उतारना बहुत बड़ी चुनौती थी. ‘विक्रम’ ने अंतिम समय में अपनी दिशा बदल दी, जिसके बाद उससे संपर्क टूट गया. आपको बता दे कि दक्षिणी ध्रुव पर आज तक कोई भी देश लैंड नहीं कर सका है.
चंद्रयान 2: लॉन्चिंग से लेकर अब तक की पूरी कहानी, जानें अब आगे क्या होगा?

🌕प्रधानमंत्री मोदी ने कहा की जीवन में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं
इसरो के वैज्ञानिकों ने लगभग 2:07 बजे बताया कि संपर्क बहाल करने की कोशिश की जा रही है. हालांकि, इसरो प्रमुख के सिवन ने 2.18 बजे बताया की ‘विक्रम’ से संपर्क टूट गया है. हम आंकड़ों का विश्लेषण कर रहे हैं. वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने के. सिवन और उनकी टीम का हौसला बढ़ाते हुए कहा की जीवन में उतार-चढ़ाव आते रहते है

🌕जीएसएलवी एमके-3 का इस्तेमाल
इस मिशन हेतु भारत के सबसे शक्तिशाली 640 टन के रॉकेट जीएसएलवी एमके-3 का इस्तेमाल किया गया था. यह 3890 किलो के चंद्रयान-2 को लेकर गया था.

🛰चंद्रयान-1 साल 2008 में लॉन्च हुआ
भारत ने इससे पहले चंद्रयान-1 वर्ष 2008 में लॉन्च किया था. यह भी मिशन चाँद पर पानी की तलाश में निकला था. भारत ने वर्ष 1960 के दशक में अंतरिक्ष कार्यक्रम शुरू किया था. चंद्रयान 1 की खोजों को आगे बढ़ाने हेतु चंद्रयान-2 को भेजा गया है.

🛰चंद्रयान-2 क्या है?

चंद्रयान-2 एक अंतरिक्ष यान है. इसके तीन सबसे अहम हिस्से लैंडर, ऑर्बिटर और रोवर हैं. चंद्रयान-2 दस साल के भीतर भारत का चंद्रमा पर भेजा जाने वाला दूसरा अभियान है. चंद्रयान-2 का वजन 3,877 किलोग्राम है. इसरो ने पहले सफल चंद्रमा मिशन - चंद्रयान-1 का प्रक्षेपण किया था जिसने चंद्रमा के 3,400 चक्कर लगाए थे. चंद्रयान-1 (29 अगस्त 2009 तक) 312 दिनों तक काम करता रहा था. यह चंद्रयान-1 मिशन से करीब तीन गुना ज्यादा है.
ऑर्बिटरः चंद्रयान-2 का ऑर्बिटर चांद से 100 किमी ऊपर स्थापित किया गया. ऑर्बिटर' में आठ पेलोड, तीन लैंडर और दो रोवर है. यह चक्कर लगाते हुए लैंडर और रोवर से प्राप्त जानकारी को इसरो सेंटर पर भेजेगा.

लैंडर (विक्रम): लैंडर विक्रम में 4 पेलोड हैं. यह लैंडर 15 दिनों तक वैज्ञानिक प्रयोग में रहेगा. इसरो के स्पेस एप्लीकेशन सेंटर, अहमदाबाद ने इसकी सबसे शुरुआत की डिजाइन बनाया था. इसे बाद में बेंगलुरु के यूआरएससी ने विकसित किया था. लैंडर का नाम इसरो के संस्थापक और भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के जनक विक्रम साराभाई के नाम पर रखा गया है.

चंद्रयान 2: लॉन्चिंग से लेकर अब तक की पूरी कहानी, जानें अब आगे क्या होगा?

रोवर (प्रज्ञान): यह एक रोबोट है. इसका वजन 27 किलोग्राम है. इस रोबोट पर ही पूरे मिशन की जिम्मदारी है. इसमें दो पेलोड हैं. चांद की सतह पर यह करीब 400 मीटर की दूरी तय करेगा. यह इस दौरान विभिन्न वैज्ञानिक प्रयोग करेगा.